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हेपेटाइटिस – बी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट

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    हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक बिमारी है। इस बिमारी के कारण लिवर में सूजन और जलन होती है। हेपेटाइटिस बी एचआईवी से अधिक खतरनाक होता है क्योंकि हेपेटाइटिस बी बैक्टीरिया कम से कम सात दिनों तक शरीर से बाहर रहकर एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। उपस्थित सभी हेपेटाइटिस वायरस में से, सबसे खतरनाक वायरस ‘बी’ माना गया है।

    यह वायरस संक्रमित सूई या असुरक्षित यौन संबंध के कारण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि आप हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हैं और आपको इस बिमारी का अनुभव भी नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह संभव है कि इसके लक्षण दिखाई देते है । यहां तक कि अगर इसके लक्षण दिखाई देते हैं, तो वे फ्लू के लक्षणों की तरह दिखाई देते हैं। लेकिन इस स्थिति में भी आप अपने आसपास के लोगों को इससे संक्रमित कर सकते हैं। यह वायरस ऐसा है कि इसे शरीर से पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। लेकिन हां, इसे आयुर्वेदिक औषधियों के जरिए निश्चित रूप से नियंत्रित में किया जा सकता है। हरियाणा के प्रसिद्ध नाड़ी एक्सपर्ट (आयुर्वेदा#कंसलटेंट / वैलनेस#कोच ) डॉ. अभिमन्यु भार्गव जी ने बताया कि हेपेटाइटिस बी के दौरान, रोगी अपने आहार में कुछ सावधानियाँ द्वारा इसे काबू कर सकते है !

    हेपेटाइटिस बी सक्रमण है क्या ?

    पीलिया या हेपेटाइटिस एक लिवर डिसऑर्डर है जिसमे जिगर में सूजन और जलन होती है जो कई असामान्य चिकित्सा कारणों से हो सकता है। एक व्यक्ति को पीलिया, सिरदर्द, कम ग्रेड बुखार, मतली और उल्टी, भूख न लगना, खुजली वाली त्वचा और थकान जैसे लक्षण हैं। त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। इसमें मल भी पीला हो जाता है और पेशाब गाढ़ा हो जाता है। डॉ भार्गव जी ने ऐसी स्थिति में कुछ होम रेमेडीज और इसके लक्षणों के बारे में भी बताया जो इस प्रकार है !

    हेपेटाइटिस बी के लक्षण :-


    1- जोड़ों के दर्द, पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी का अहसास होता है।
    2- हमेशा थकान महसूस करना। त्वचा पीली हो जाती है और आंख का सफेद हिस्सा भी पीला हो जाता है।
    3- बुखार आता है और पेशाब का रंग भी गाढ़ा हो जाता है।
    4- भूख कम लगना।

    #हेपेटाइटिस #बी में #होम #रेमेडीज :-


    1. मूली का रस और पत्तियां :- मूली के हरे पत्ते हेपेटाइटिस बी में फायदेमंद होते हैं। मूली के रस में बहुत प्रभावी गुण होते हैं कि यह खून और लीवर से अत्यधिक बिलीरुबिन को हटाने में सक्षम होता है। पीलिया या हेपेटाइटिस में, रोगी को दिन में 2 से 3 गिलास मूली का रस पीना चाहिए। इसके साथ ही पत्तियों को पीसकर उनका रस निकाले और छान कर पी लीजिये !

    2. टमाटर का जूस :- पीलिया में टमाटर का रस बहुत फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन सी पाया जाता है, जिसके कारण यह लाइकोपीन से भरपूर होता है। इसके रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर मरीज को देने से फायदा मिलता है !

    3. आंवला :- आंवला विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है। आप इसका जूस का इस्तेमाल कर सकते है। इससे आपको संक्रमण से लड़ने में काफी राहत मिल सकती है।

    4. नींबू या अनानास का रस :- नींबू का रस पीने से पेट साफ होता है। इसे रोजाना सुबह खाली पेट पीने से हेपेटाइटिस बी में लाभ होता है। इसके अवाला अनानास का रस भी उतना ही लाभदायक होता है ।

    5. नीम :- नीम में कई एंटी-वायरल घटक मौजूद होते हैं, जिसके कारण यह हेपेटाइटिस के उपचार में उपयोगी है। यह लिवर में उत्पन्न विषाक्त पदार्थों को नष्ट करने में भी सक्षम है। इसकी पत्तियों के साथ शहद मिलाएं और सुबह खाली पेट इसे पी लें।

    6. अर्जुन की छाल :- आयुर्वेदा में माना गया है कि अर्जुन वृक्ष की छाल हृदय और मूत्र प्रणाली को अच्छा बनाती है। हालांकि, इसमें मौजूद एल्कलॉइड्स लिवर में कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को नियंत्रित करने की क्षमता भी रखते हैं।

    7. हल्दी :- हल्दी में एक अद्भुत एंटी-इन्फ्लेमेट्री, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव और बढ़े हुए लिवर ट्यूब को हटाने का काम करती है। हेपेटाइटिस बी के खिलाफ हल्दी सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।

    हेपेटाइटिस बी में इसका करे सेवन :-

    1. कॉफी- हेपेटाइटिस बी में कॉफी बहुत कारगर है। मरीज को दिन में दो से तीन बार कॉफी पीनी चाहिए। जब तक शरीर में कॉफी है, हेपेटाइटिस बी वायरस विकसित नहीं होगा।

    2. फल और सब्जियां- अधिक मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन करने से हेपेटाइटिस बी में बहुत फायदा होता है। सब्जियों के फलों के पौष्टिक तत्वों व् फाइबर रोगी को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

    3. प्रोटीन युक्त आहार- हेपेटाइटिस बी के रोगी को अपने आहार में प्रोटीन युक्त आहार को शामिल करना चाहिए। प्रोटीन युक्त आहार में वह अंडे, ड्राई फ्रूट्स आदि खा सकते है !

    4. भोजन के बारे में जागरूकता- किसी को हेपेटाइटिस बी में खाने के बारे में पता होना चाहिए या आप चाहें, तो रोगी एक से अधिक बार खा सकता है। ऐसा करने से कमजोरी नहीं आती है। या फिर आप किसी विशेषज्ञ / नूट्रिशनिस्ट से भी सलाह ले सकते है !

    5. ज्यादा पानी पीना- हेपेटाइटिस बी के मरीज को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। अधिक पानी पीने के कारण शरीर में तरलता बनी रहती है।

    इन चीज़ो के सेवन से बचना चाहिए :-
    1- फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए।
    2- कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से परहेज करें।
    3- मीठी चीजों से दूर रहें।

    उम्मीद करते है आपको इस लेख के जरिये हेपेटाइटिस बी क्या है और इसके लक्ष्ण क्या है ! और कुछ घरेलू उपायों भी बताया जो आपको काफी मदद करेंगे ! अगर आपको या आपके किसी सगे सम्भंधि को ये हेपेटाइटिस बी के लक्षण या फिर मूल्यांकन हो चूका है तो आज ही मिलिए हरियाणा के प्रसिद्ध नाड़ी #एक्सपर्ट (#आयुर्वेदा#कंसलटेंट / #वैलनेस#कोच ) डॉ. अभिमन्यु भार्गव जी से और अपना अपॉइंटमेंट लेके अपना इलाज सुनिश्चित कीजिये ! और अपना स्वस्थ जीवन व्यतीत कीजिये !

    अपॉइंटमेंट लेने के के लिए हमे कॉल कीजिये @ 8813 830 830

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