ब्लड कैंसर के मरीजों की संख्या में हर रोज इजाफा होता जा रहा है और इसके इलाज का तरीका भी उतना ही तकलीफ दायक ! ब्लड कैंसर बच्चों से लेकर बड़ों में पाया जाता है। तक़रीबन यह बीमारी 30 वर्ष के बाद ज्यादा होने की संभावना पायी जाती है। डॉ अभिमन्यु जी ने बताया हैं कि ब्लड कैंसर कई तरह का होता है। इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है।लेकिन अगर आप थोडी सी समझदारी से काम लेंगे तो इस जानलेवा बीमारी को आयुर्वेदा चिकित्सा द्वारा आसानी से खुद का बचा सकते हैं !
#हरियाणा के #प्रसिद्ध#नाड़ी#विशेषज्ञ (#आयुर्वेदिक #एक्सपर्ट,#वेलनेस#कोच ) डॉ अभिमन्यु भार्गव जी का कहना है कि ब्लड कैंसर के इलाज के तौर पर प्रयोग की जाने वाली कीमोथैरेपी कैंसर पीड़ित मरीज को दर्दनाक मौत की तरफ ले जा सकती है ! सही समय पर इसकी जांच और इलाज से इसे काबू में किया जा सकता है।
डॉ भार्गव जी ने इसके लक्ष्णों पर भी चर्चा करते हुए बताया ये लक्षण दिल की बीमारी नहीं बल्कि ब्लड कैंसर के संकेत हो सकते हैं।
*भूख की कमी
*त्वचा का लाल रहना
*हड्डियों और जोड़ों में लगातार दर्द होना।
*मुंह, नाक या शौच के दौरान खून का निकलना,
* लगातार बुखार आना !
*रात में पसीना आना , ठंड लगना, थकान और चक्कर आना।
*बार-बार संक्रमण और शरीर का वजन घटना
डॉ अभिमन्यु जी ने बताया कि ब्लड कैंसर कोशिकाओं में उपरोक्त परिवर्तन की वजह से शुरू होता है। यह खून (बोन मैरो) में होता है। ब्लड कैंसर तीन प्रकार का पाया जाता है। इसमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा
और मायलोमा।
लेकिमिया: रक्त कैंसर का यह रूप हमारे शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं पर असर डालता है। हमारे शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे संक्रमण से लड़ती हैं और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती हैं। तीव्र ल्यूकेमिया का तुरंत इलाज किया जाना चाहिए यह समय के साथ विकसित हो सकता है।
लिंफोमा :- लिम्फोमा रक्त कैंसर का एक रूप है जो आमतौर पर लिम्फैटिक प्रणाली पर अपना असर डालती है ! यह प्रणाली आपके शरीर को रोग और संक्रमण से बचाती है। यह विकार आपके शरीर को
बहुत अधिक सफेद रक्त कोशिकाओं बनाता है यह आपके प्लीहा, रक्त, अस्थि मज्जा और लिम्फ नोड्स
में विकसित हो सकता है।
मायलोमा :- इस बीमारी को कई माइलोमा के रूप में भी जाना जाता है, यह रक्त कैंसर का एक रूप है जो प्लाज्मा कोशिकाओं पर अपना प्रभाव डालता है। ये प्लाज्मा कोशिकाएं आपके बोन मेरो के अंदर स्थित होता हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायता करता हैं।
#हरियाणा के #प्रसिद्ध#नाड़ी#विशेषज्ञ (#आयुर्वेदिक #एक्सपर्ट,#वेलनेस #कोच ) डॉ अभिमन्यु भार्गव जी ने बताया आयुर्वेद के अनुसार कैंसर क्या है ??
इस स्थिति में, अमल या विषाक्त अपशिष्ट पदार्थ शरीर में फैल जाते हैं। • स्थानीयकरण – दोष शरीर के कमजोर हिस्से पर होता है • डीएनए में क्षति या उत्परिवर्तन शरीर के कोशिका विभाजन में शामिल जीन को नुकसान पहुंचाता है। • तम्बाकू, अभ्रक, आर्सेनिक, विकिरण, पराबैंगनी किरणों आदि के संपर्क में आने जैसे खराब आदते ।उन्होंने बताया आयुर्वेद में ही छिपा है रक्त कैंसर का इलाज कैंसर को एक घातक और जटिल रोग माना गया है। यह एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। परिणामस्वरूप शरीर के सारे अंगो में विष फ़ैल जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में औषधि के साथ साथ भोजन और जीवन शैली में संयम जो त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) असंतुलन को ठीक करता है।इलाज एवं पंचकर्म के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को समाप्त करना ! पाचन शक्ति को बढ़ाना ! आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा किमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी के साइड इफेक्ट को कम करने में मदद करती हैं।
डॉ भार्गव जी ने बताया कि आयुर्वेद जगत की अहम बात यह है कि अमेरिका जैसा बड़ा देश भी आयुर्वेदा के जरिये कैंसर के इलाज लेने में काफी दिलचस्पी ले रहा है ! डॉ अभिमन्यु जी का #18 सालो के
गहन शोध और उनके अपने मरीजों के #अनुभव से बताया है कि #आयुर्वेद में ही छिपा है कैंसर का इलाज और पूर्ण चिकित्सा लेने पर नहीं होगा दोबारा जीवन भर कैंसर होने का खतरा !
डॉ अभिमन्यु भार्गव के #संसथान में #आयुर्वेदा#द्वारा रक्त कैंसर के मरीजों में सफल इलाज का इजाफा हो रहा है ! यदि इसका जल्दी इलाज किया जाए । #कैंसर का प्रकार और कैंसर की अवस्था इसकी
वक्रता पर #महत्वपूर्ण असर डालती है। अगर आप भी ब्लड कैंसर की चपेट में आ चुके है तो घबराइए नहीं ! अब इसका #इलाज #संभव है भार्गव #आयुर्वेदा संसथान के विशिष्ट डॉ अभिमन्यु भार्गव जी के
पास !
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