दुनिया भर में खान पान, दिनचर्या एवं तनावग्रसित जीवन शैली के कारण, शुगर के रोगियों में बहुत तेजी से इजाफा होता जा रहा है ! जिसे चिकित्सा की भाषा में डायबिटिक मेलिटस या हाइपर ग्लाईसेमिया कहा जाता है ! पूरे भारत में लगभग १३ करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रसित है ! कुछ लोग डायबिटिक के होने के बहुत नजदीक है ! दोनों को खासकर जरुरी ध्यान देने योग्य बाते ! जिसको आज हम गाइडेंस एवं सुझाव प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य डॉ.अभिमन्यु भार्गव से जानेगे :
पूरी दुनिया में इस बीमारी का इलाज तो लोग ले रहे है ……केवल शुगर लेवल को घटाने या नार्मल में लाने के लिए ! फिर भी शरीर के अंदरूनी मेटाबोलिक कारणों के चलते काफी लोगो की शुगर दवा लेने के बाद भी नार्मल नहीं आती है, उन लोगो को भी और जिन लोगो की नार्मल भी रहती शुगर दवा के प्रयोग से! दोनों प्रकार के लोग -शुगर रोग के पुराने होने के साथ -साथ , शारीरिक कमजोरी, थकान, नसों , मांसपेशियों में दर्द, नसों में दर्द एवं सुन्नपन , यौन दुर्बलता, शुगर की दवा का बढ़ना, वजन कम होना तमाम प्रकार के लक्षण मिलने लगते है, जिसके कारण शुगर रोगी निराश एवं परेशान रहता है ! ताकत की दवा लेता है लेकिन उसका प्रभाव, केवल कुछ समय के लिए ताकत का अनुभव होता है, बाद में फिर वैसा ही !
तो आइये जाने कि आयुर्वेद के प्रसिद्ध नाड़ी एक्सपर्ट,वैलनेस कोच, आयुर्वेदा कंसलटैंट -डॉ.अभिमन्यु भार्गव से :
मित्रो ,
शुगर आयुर्वेद के नजरिये से पुराना प्रमेह है ! जब शरीर में मेटाबोलिक एवं पाचक अग्नि की मंदता के कारण कफ की मात्रा निरंतर बनने एवं अधिक होने के कारण, वायु के साथ बॉन्डिंग करके पेशाब का गंदा आना और इसकी सही चिकित्सा नहीं हुई तो बाद में मधुमेह रोग पैदा हो जाता है ! जैसे शुरू में लक्षण- ज्यादा पेशाब, कमजोरी, थकान, प्यास और भूख ज्यादा लगाना , इनमे से कोई -कोई सभी लक्षणों से और कई एक आध लक्षणों के प्रभवित होते है !
डायबिटीज दो प्रकार का होता है
टाइप वन : इंसुलिन के ऊपर रोगी का निर्भरता रहना, जो एक, पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने वाली सेल्स वायरल संक्रमण या जेनेटिक कारण से, इंसुलिन न बनने के कारण भारी मात्रा में कमी होने से !
टाइप टू : इंसुलिन के ऊपर निर्भर नहीं ! जब पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने वाली सेल्स द्वारा डिफेक्टिव इंसुलिन का बनना या कोशिकाओं का इंसुलिन का उपयोग करने में अक्षम ! मोटे लोगो को अक्सर इस प्रकार वाली डायबेटीस से ज्यादे ग्रसित होते है ! और यही कारण है कि युवा पीढ़ी भी जंक फ़ूड ,गलत खान पान, व्यायाम की कमी, आलस्य पूर्ण जीवन, शरीर श्रम नहीं के बराबर होने के कारण से तेजी से इस रोग के चपेट में आ रही है !
कैसे जाने की शुगर टाइप टू की चपेट में आने वाले है?
जब आप का मोटापा, केवल पेट और नितम्ब ( हिप ) पर आये, और आप के शरीर का ढोलक के आकर का होने लगे तो, …….आप निकट भविष्य में शुगर के रोगी होने वाले है !
जरूर धयान दे, एक्सपर्ट सलाह ले और रोग से पीड़ित होने से बचे!
#नोट : रोगी अगर अपने आप सचेत, संयमित जीवन जिए, तो बड़ी आसानी से बिना दवा के, डाइट एवं प्रकृति दवा का ध्यान दे तो टाइप टू को रिवर्सेबल भी कर सकता है !
चिकित्सा :
सही चिकित्सा का आशय है की ब्लड शुगर को केवल कम करने का उपाय ही नहीं, बल्कि साथ में मुलभुत कारणों को भी इलाज किया जाये ! तो शुगर का रोगी अपने जीवन में ढेर सारी कम्प्लीकेशन और होने वाली निराशा से अपने आप को बचा सकता है !
ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करे @ …..https://www.youtube.com/watch?v=Cd6tw–JDmo&t=2s
इस कड़ी में वैद्य जी ने शुगर के रोगियों के लिए, प्राकृतिक तरीके से लड़ने के लिए:- मधु जीवन रस ,गहन शोध के बाद विकसित किया है, जिसका सेवन करके आप शुगर रोग से होने वाले साइड इफ़ेक्ट से बचा सकते है, इतना ही नहीं बहुत सारे लोगो की शुगर भी ५-६ बोतल पीने के बाद नियंत्रित हो जाती है और तंदरुस्त, मजेदार स्वास्थ्य एवं निरोगी काया पा सकेंगे !
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