बॉडी माइंड कॉन्शसनेस जीवन के आधार है इनका पोषण वाइटल प्राण यानी हमारा आहार और न्यूट्रिएंट्स प्राण यानी शुद्ध ऑक्सीजन मय प्राकृतिक हवा है। बॉडी माइंड और कॉन्शियस नेस संतुलित रहना कार्य करना ही सफल और सफल जीवन है ।
शरीर के सभी अंग टिशू कोशिकाओ की अपनी एक नेचुरल इंटेलिजेंस होती है और वह उसी के दायरे में अपने कार्य को करती हैं और मनसा वाचा कर्मणा यानी मन बाणी और कर्म से जुडी भावनाओं को भी समाहित करती हैं। आप सुनते और देखते हैं किसी किसी को भावनाओं से आहत होने पर हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ता है केवल हृदय ही नहीं भावनाओं का इंटेलिजेंस और फीलिंग रखता है बल्कि लीवर, स्प्लीन , ब्रेन, हार्ट, इम्यून सिस्टम भी इमोशन से गहरा नाता रखते हैं। भावनाओं को पहचानते हैं समझते हैं और उसके अनुरूप कार्य करते हैं। विषय गहरा है और चिंतन योग्य भी है इसलिए थोड़ा इसको उदाहरण लेकर समझने का प्रयास करते हैं जैसे दिल दुखाने वाली बात से डिप्रेस्ड हो जाना, डर एवं भय से हृदय की धड़कन बढ़ जाना और पेट में अचानक गैस का भर जाना। भावों के अधीन क्रिया और प्रतिक्रिया के अनुसार मन का खुश होना और डिप्रेस्ड होना भी इसी का उदाहरण आपने भी अक्सर देखते है किसी अप्रिय घटना होने के कारण, सुनने के कारण अकस्मात भूख न लगना आंसू का चलना यह सब सेलुलर इंटेलिजेंस के उदाहरण एवं साक्षात प्रमाण यदा-कदा देखने को मिलते हैं। ठीक इसी प्रकार शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं जो बार-बार प्रभावित होकर रोगों का जन्म देते हैं। यही सब तन और मन के रोग के कारण बनते हैं।
इसी का दूसरा पक्ष रिप्रेस्ड इमोशन भी है। बहुत सारे लोग के पास खाने-पीने ऐसो आराम किस सभी चीजें प्रकृति द्वारा ब्लेस है लेकिन वह फिर भी शारीरिक और मानसिक रूप से दुखी रहते हैं उसके पीछे कारण रिप्रेस्ड इमोशन, खानपान का विवेकपूर्ण, शरीर अनुकूल सेवन ना करने से ज्यादा होता है। यह मेरा चिकित्सकीय और व्यावहारिक अनुभव है।
आयुर्वेद दिव्य शक्तियों से भरपूर आपके तन और मन दोनों के लोगों को ठीक करने में बहुत ही कारगर है अपनाएं और जीवन को सुखी स्वस्थ करें और स्वस्थ समाज का निर्माण करें। संकल्प शक्ति संयमित जीवन निश्चित रूप से आपको अपने जीवन में खुशी देगा ही बल्कि अपने देश को भी आत्मनिर्भर सम्माननीय उत्पादकता बढ़ाने में सही सटीक भूमिका अदा करेगा।
तन और मन के रोगों का मूल्यांकन में नाड़ी निदान एक शास्त्रीय प्रमाणिक विधा है जिसके आधार पर शरीर में होने वाले समस्त रोगों की पैथॉफिजियोलॉजिकल प्रोसेस, और अंगों के डिफेक्टिव स्पेस उसके बिहेवियर के बारे में जाना जाता है । मूल्यांकन कराएं,जाने और अपनाएं। स्वस्थ बने और अपने प्रिय जनों को स्वस्थ बनाने में मदद करें।
आयुर्वेद संस्थान 100% शुद्ध प्राकृतिक जड़ी बूटियों से आपके शरीर का ,आपकी बॉडी कांस्टिट्यूशन के हिसाब से सफल एवं सटीक इलाज देने की हमेशा प्रतिबद्ध है और ऐसी कामना करता है सभी लोग स्वस्थ एवं मंगलमय हो खुशहाल जीवन जीए।
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