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भगंदर आयुर्वेदिक उपचार ( Say No To Surgery )

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    भगंदर गुदा क्षेत्र में होने वाली एक फिस्टुला है जो फोड़े द्वारा निर्मित होती है। इसे अंग्रेजी में फिस्टुला कहा जाता है। यह गुदा की त्वचा और आंत्र की मांसपेशियों के बीच एक संक्रमित सुरंग बनाता है, जहां से मवाद का स्राव जारी रहता है।यह बवासीर से पीड़ित लोगों में अधिक पाया जाता है। मवाद को सर्जरी या आयुर्वेदा चिकित्सा या क्षार सूत्र द्वारा हटाया और कीटाणुरहित किया जाना है। इससे फिस्टुला की बिमारी में काफी राहत मिलती है।फिस्टुला की बिमारी गुदा के पास एक फोड़ा के साथ शुरू होती है और ये फोड़े गुदा में संक्रमण के कारण हो सकते हैं। यह संक्रमण गुदा के आसपास फैल सकता है, फोड़े में दर्द और सूजन होने लगती है और कुछ लोगों को बुखार की शिकायत भी हो जाती है।मवाद फोड़े में भर जाता है, जिसकी बजह से उस जगह पर एक नाली बन जाती हैं और अगर इसका शरुआत ही में इलाज नहीं किया जाए तो यह फिस्टुला बन जाता है। भगंदर रोग ज्यादातर 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में देखा जाता है और पुरुषों में महिलाओं की तुलना में इस बिमारी को ज्यादा देखा जाता है !

    फिस्टुला / भगंदर के लक्षण

    • गुदा के पास बार-बार फोड़े होना

    • मवाद का निर्वहन

    • मल त्याग के दौरान दर्द

    • गुदा से खून आना

    • गुदा के आसपास जलन

    • गुदा के आसपास सूजन

    • गुदा के आसपास दर्द होना

    • खूनी या दुर्गंधयुक्त स्त्राव

    • थकान महसूस होना

    • संक्रमण के कारण बुखार और ठंड लगना

    फिस्टुला / भंगंदर रोग के कारण

    • बवासीर का होना

    • गुर्दा द्वार का स्वच्छ न रहना

    • पुरानी कब्ज

    • वैक्टीरियल संक्रमण के कारण।

    • एनोरेक्टल कैंसर से।

    • खुजली या किसी अन्य कारण से गुदा में घाव का होना ।

    • लंबे समय तक कठोर या ठंडे स्थान पर बैठना।

    आयुर्वेद में, कुछ जड़ी-बूटियाँ जैसे अर्गवधा, हरड़ और त्रिफला, आंवला, विभिटकी और हरीतकी का उपयोग भगन्दर के उपचार के लिए किया जाता है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य में सुधार और फोड़े को ठीक करने के लिए जड़ी-बूटियों के साथ विभिन्न हर्बल मिश्रण जैसे कि आरोग्यवर्धनी वटी, त्रिफला गुग्गुल और अभ्यारिष्ट का भी उपयोग से आप भगंदर को ठीक कर सकते है !इसके अलावा, अपने आहार में फलों और सब्जियों को शामिल करें और टहलने, बाहर खेलने जैसी शारीरिक गतिविधियों को कम करके,जीवनशैली में कुछ आवश्यक बदलाव से भगंदर को नियंत्रित किया जा सकता है। अपने आहार में हरे चने , पत्तेदार सब्जिया , गेहू, नीम, किशमिश, पुराने चावल, बकरी का दूध, मिर्च , मूली, बैगन, बेल और चने की दाल को शामिल करे एवं हल्क़ा भोजन खाएं !

    अगर आपको भी फिस्टुला या भंगदर के रोग से पीड़ित है और इसका कोई स्थायी इलाज नहीं मिल पा रहा है तो आज ही मिलिए #हरियाणा के #प्रसिद्ध नाड़ी एक्सपर्ट (#आयुर्वेदा#कंसलटेंट / #वैलनेस #कोच ) डॉ. अभिमन्यु भार्गव जी से !

    अपॉइंटमेंट लेने के के लिए हमे कॉल कीजिये @ 8813 830 830

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